सूरज से कर मीठी बात
आओ रश्मि पाजेब पहन
प्रतीक्षा में रहूँ तुम्हारे
करता चिंतन और मनन
आ भी जाओ पास हमारे
मीठे सुर की पाजेब पहन
सर्र सर्र करती बहे हवा
संताप बढाती मेरे मन
बन आ जाओ मधुर दवा
पत्तों की पाजेब पहन
रंग बिरंगे खिले फूल
भ्रमर वृन्द करता गुनगुन
खिली शाख पर आओ झूल
पाजेब कली बाजे झुनझुन
रिमझिम रिमझिम सी बूँदें
शीतलता निर्मल करे वहन
लहराती आओ आँखें मूंदे
गंगाजल की पाजेब पहन
घटता बढ़ता चन्द्र सुदर्शन
प्रेम जगाता विरह दहन
आ जाओ लेकर आकर्षण
चंदनिया की पाजेब पहन
सातों सुर बजने को आतुर
एकतारे का टूटा तार
आ जाओ होकर प्रीतातुर
पहना पाजेब करूँ मनुहार .
