आया वसंत
लाया उमंग
हवा में घोला
उसने भंग.
मन हर्षित
रोम पुलकित
नैन अर्पित
स्नेह अलौकिक .
बिखरा पराग
अंग अंग
अबीर बारात
फैलाये सुगंध
भ्रमर सुनाये
गुनगुन गीत
कलियाँ ओढ़े
चूनर पीत
तितली मुस्काए
पुष्प आलिंगन
पलकें झुक जाए
रंगों का बंधन
फूली सरसों
खेत मन भाया
धानी चूनर ओढ़
ऋतुराज आया
दहके पलाश
भरकर रंग
महुआ महके
आँगन हुडदंग
अम्बर झूमर
अमलताश लरजे
मोहक इतना
प्रेमपाश जैसे
देहरी खड़ा
रंगीला फाग
गूंजे ह्रदय
राग अनुराग
बसंत ऋतु आई
रंग है बिखेरा
रंग भरी तूलिका
कुशल है चितेरा
महके मंजरी
आम्र बौराए
गोरी ठिठकी
वो मिलने आये..




