सब ओर छाया
नवीन उल्लास
ऋतुराज ने किया
कोई परिहास
आम में मंजर
कटहल में फूल
धरा चाहे बंजर
कटहल में फूल
धरा चाहे बंजर
हरीतिमा रही झूल
पायल की रुनझुन
गोरी के पाँव
गाये गीत गुनगुन
पीपल की छाँव
पायल की रुनझुन
गोरी के पाँव
गाये गीत गुनगुन
पीपल की छाँव
धीमे सुर में
मीठे स्वर में
ताप हर जाती
कोयल गाती
ताप हर जाती
नई उमंग
प्रीत है नई
मन में तरंग
आशाएं कई
ह्रदय हुलसी
सपनों की लड़ी
आँगन तुलसी
जोडती कड़ी
पतझड़ हारा
आई नव कोपल
परिवेश सारा
नूतन कोमल .





