व्यर्थ हूँ मैं
यदि नहीं दे पाऊं
सूर्य को अर्ध्य
तुम्हारे लिए
व्यर्थ हूँ मैं
यदि न भर दू
अरुणिमा भोर की
तुम्हारे मुख पर
व्यर्थ हूँ मैं
यदि न हर लूं
अवसाद सारे
तुम्हारे हिस्से के
व्यर्थ हूँ मैं
यदि न जान लूं
हलचल भारी
तुम्हारे ह्रदय की
व्यर्थ हूँ मैं
यदि न पढ़ लूं
बोल अबोले
तुम्हारी आँखों के
व्यर्थ हूँ मैं
यदि न गढ़ दूं
एक प्रतिमान
स्नेह और विश्वास का
व्यर्थ हूँ मैं
यदि न रच दूं
रचना एक
तुम्हारे मन अनुकूल
व्यर्थ हूँ मैं
यदि न भर दूं
भाव मनोरम
तुम्हारी कविता में.





