Tuesday, March 15, 2011

गुलाब
















गुलाब 
अलग अलग रंग और 
गंध लिए 
भिन्न भिन्न क्यारियों और 
जलवायु से 
चले आते हैं 
फूलों की मण्डी में

जहाँ लगाई जाती है 
इनकी बोली और कीमत 
सुगंध और संवेदनाओं को परे रखकर
कितने चाव से उगाया था 
माली ने इसे 
संवाद की अथक  
क्षमता लिए 
आज पड़ा है भावशून्य 
बीच बाजार 

खरीदार आते हैं 
करते हैं मोलभाव 
दरक जाता है कुछ 
भीतर गुलाब के 
चाहते हैं लेना पर 
कम करते हैं भाव  
और मुरझा जाती है 
एक पंखुड़ी  

सोच में है फूल 
होगा क्या 
सजाऊंगा किसका घरोंदा  
बनूगां किसके गेसुओं का हीरा 
धड्कूंगा किसी हीर के हाथों में 
या मनाऊंगा मातम
किसी के टूटे दिल पर 

समाई  है जिसमें 
प्रीत की ऊष्मा 
देखते ही खिल उठता है
हर हारा हुआ चेहरा भी  
पर लगा दिया जाता है 
ठंडी बर्फ में 
ताकि जी  सके  ज्यादा 
मारकर अपना मन .

देखते ही गुलाब 
हर्षित होता है तन मन 
पर सर्द में लगा देख 
जम गया है उत्साह 
हो आई है सहानुभूति 
प्रेम स्नेह और शुभकामना 
के प्रतीक 
गुलाब से .   

15 comments:

  1. कोल्ड स्टोरेज के युग में गुलाब प्रेमियों के हाथ में पहुचने से पहले बर्फ में लगा दिया जाता है.. इस पहलु पर शायद पहली कविता हो यह.. बहुत बढ़िया..

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  2. बहुत सुन्दर और लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  3. देखते ही गुलाब
    हर्षित होता है तन मन
    पर सर्द में लगा देख
    जम गया है उत्साह ..

    ये यंत्रणा है आज के युग की ... सब कुछ कोल्ड स्टोर में च्ला जाता है ... भाव, मन और भी बहुत कुछ ...

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  4. alag alag tarah ke gulab...:)
    shaniwar ko hi mughal garden me dekha tha.:D

    par ek dum alag tarah ki rachna...gulab ko bimb bana kar aapne to kuchh aur hi dikha diya..

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  5. गुलाब का ठंडापन, कुछ अटपटा सा हो गया गुलाब।

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  6. सच में यह गुलाब ....

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  7. नमस्कार !
    बहुत सुन्दर और लाजवाब रचना !
    साधुवाद

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  8. जहाँ लगाई जाती है
    इनकी बोली और कीमत
    सुगंध और संवेदनाओं को परे रखकर
    गुलाब की व्यथा है बेचारा ! सुन्दर अभिव्यक्ति , बधाई

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  9. गुलाब' ... बिलकुल यु टर्न ले लिया है आपने ने इस कविता में... महादेवी से अज्ञेय ... अलग दृष्टि की कविता है...

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  10. gulab ke mano bhavon ko bakhoobi vyakt kiya hai aapne...

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  11. बहुत सुन्दर और लाजवाब रचना !

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  12. कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका

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  13. जहाँ लगाई जाती है
    इनकी बोली और कीमत
    सुगंध और संवेदनाओं को परे रखकर
    मार्मिक है इस गुलाब की कहानी भी बहुत अच्छी रचना। बधाई।

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  14. देखते ही गुलाब
    हर्षित होता है तन मन
    पर सर्द में लगा देख
    जम गया है उत्साह
    हो आई है सहानुभूति
    प्रेम स्नेह और शुभकामना
    के प्रतीक
    गुलाब से .
    Komal,anoothe bhaav!

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