Friday, October 29, 2010

मेरे हिस्से का आसमान












बादल है गडड मड्ड
रहे हैं घुमड़
लेकर अपनी स्याही
ओट में है
आशाओं का सूरज
धूमिल हो रहे है
मेरी किस्मत के सितारे .

गडगडाहट से इनकी
गिरती हैं
उम्मीदें
कड़कड़ाहट से इनकी
डिगता  है
विश्वास  .

छाये है
बनकर कालिमा
लक्ष्यों पर मेरे
छिपायें है
सारी लालिमा
भोर की मेरे

अब बरस भी जाओ
फुहार बनकर
या बहक ही जाओ
बहार बनकर
कि छंट जाए
ये बादल चौमासे
चमक जाए सूरज
मेरे ओसारे

हो जाए धवल
मेरे हिस्से का आसमान
खिल उठे चांदनी
चाँद की मेरे
लाल हो जाए लाली
आदित्य की मेरे

17 comments:

  1. अब बरस भी जाओ
    फुहार बनकर
    या बहक ही जाओ
    बहार बनकर
    कि छंट जाए
    ये बादल चौमासे
    चमक जाए सूरज
    मेरे ओसारे
    waaaaah

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  2. खूब संवाद है, प्रकृति के माध्‍यम से।

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  3. आशाओं का सूरज
    प्यारी कविता

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  4. सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  5. हो जाए धवल
    मेरे हिस्से का आसमान
    खिल उठे चांदनी
    चाँद की मेरे
    लाल हो जाए लाली
    आदित्य की मेरे

    बहुत सुन्दर ...आशावान रचना

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  6. हो जाए धवल
    मेरे हिस्से का आसमान ....

    बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

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  7. हो जाए धवल
    मेरे हिस्से का आसमान
    स्वच्छ इच्छा .. स्वच्छ एहसास

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  8. बहुत सुन्दर कविता...
    मेरे हिस्से का आसमान.. अच्छा विम्ब प्रयोग है...

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  9. मन के भाव दर्शाने के लिए बिम्बों का प्रयोग अच्छा लगा।

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  10. "अब बरस भी जाओ
    फुहार बनकर
    या बहक ही जाओ
    बहार बनकर
    कि छंट जाए
    ये बादल चौमासे
    चमक जाए सूरज
    मेरे ओसारे "... आशा से भरी कविता.. नूतन विम्ब प्रयोग !

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  13. और कितना बरसाना है
    इन बादलों को,
    बस भी करो
    क्यों सबको परेशां करना चाहते हो,


    क्योंकि जब जब बादल बरसता है
    तब तब या तो कोई बर्बाद होता है
    या कोई आबाद होता है

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  14. हो जाए धवल मेरे हिस्से का आसमान...

    मनमोहक रचना।

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  15. बहुत बेहतरीन!

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  16. मौसम के मिज़ाज को बहुत सुंदर ढंग से दर्शाया है आपने...बढ़िया प्रस्तुति...बधाई

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  17. अहसासों का बहुत अच्छा संयोजन है ॰॰॰॰॰॰ दिल को छूती हैं पंक्तियां ॰॰॰॰

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