Wednesday, November 10, 2010

लक्ष्य नहीं मैं

व्यक्तित्व में मेरे
थोडा गुरुत्व
करता आकृष्ट
तुम्हारा प्रभुत्व .

निजता मेरी
लगे भली
तुमको देती
कुछ खलबली .

शब्द मेरे
थोड़े साधारण
लगते तुमको
अति असाधारण .

सपने मेरे
आँखों में तुम्हारी
प्रश्न तेरे
भरते हैं खुमारी .

पलकें मेरी
आस सजाये
होगी पूरी
दिन कब आये .

भाव मेरे
लगते अनदेखे
मन के चितेरे
रहते बिनदेखे .

मेरा मोहपाश
तुमको बांधे
लक्ष्य नहीं मैं
बढ़ जाओ आगे .

16 comments:

  1. प्रवाहपूर्ण रचना अच्छी लगी।

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  2. व्यक्तित्व में मेरे
    थोडा गुरुत्व
    करता आकृष्ट
    तुम्हारा प्रभुत्व .

    निजता मेरी
    लगे भली
    तुमको देती
    कुछ खलबली .

    Bahut sundar rachna.


    .

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  3. बहुत प्रवाहमयी रचना ...

    मेरा मोहपाश
    तुमको बांधे
    लक्ष्य नहीं मैं
    बढ़ जाओ आगे .

    अब यह तो नाइंसाफी है ...

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  4. सपने मेरे
    आँखों में तुम्हारी
    प्रश्न तेरे
    भरते हैं खुमारी .
    पूरी रचना बहुत सुन्दर और गहरे भाव लिये। बधाई।

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  5. व्यक्तित्व में मेरे
    थोडा गुरुत्व
    करता आकृष्ट
    तुम्हारा प्रभुत्व .

    naa je aapke prabhutav ko ham sweekar karte hain...:)

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  6. मेरा मोहपाश
    तुमको बांधे
    लक्ष्य नहीं मैं
    बढ़ जाओ आगे
    काश आदमी पाश से बचने की कला जानता तो लक्ष्‍य को पहचान पाता।
    पल-पल जग में मिला निमंत्रण,
    बॉंहों का फैला आमंत्रण,
    ऑंखों में पर लक्ष्‍य बसा था
    इस कारण रह सका नियंत्रण।

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  7. सपने मेरे
    आँखों में तुम्हारी
    प्रश्न तेरे
    भरते हैं खुमारी . ...

    कुछ प्रश्न जिनका जवाब आसान नहीं होता.. खुमारी ही भरते हैं .

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  8. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 16 -11-2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

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  9. शब्द मेरे
    थोड़े साधारण
    लगते तुमको
    अति असाधारण

    गहरे भाव लिये बहुत सुन्दर रचना......शुक्रिया

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  10. बहुत सुन्दर भाव संयोजन्।

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  11. पलकें मेरी
    आस सजाये
    होगी पूरी
    दिन कब आये

    sunder

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  12. पलकें मेरी
    आस सजाये
    होगी पूरी
    दिन कब आये .
    ===============
    बहुत खूब !

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  13. बहुत अच्छा लिखती हैं आप !
    बधाई हो !

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  14. मेरा मोहपाश
    तुमको बांधे
    लक्ष्य नहीं मैं
    बढ़ जाओ आगे
    बहुत खूब अलग अन्दाज की रचना

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